Hurt Shayari in Hindi | हर्ट शायरी

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Hurt Shayari in Hindi

सिर्फ एक ही बात सीखी इन हुस्न वालों से हमने​​,
हसीन जिसकी जितनी अदा है वो उतना ही बेवफा है।

चुप हैं किसी सब्र से तो पत्थर न समझ हमें,
दिल पे असर हुआ है तेरी बात-बात का।

तहज़ीब में भी उसकी क्या ख़ूब अदा थी,
नमक भी अदा किया तो ज़ख्मों पर छिड़क कर।

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ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है,
जुल्फों-रुखसार की जन्नत नहीं कुछ और भी है,
भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में,
इश्क ही एक हकीकत नहीं कुछ और भी है।

इंसान के जिस्म का सबसे खुबसूरत हिस्सा दिल होता है,
अगर वही साफ़ नहीं तो चमकता चेहरा किसी काम का नहीं।

मैं उसके चेहरे को दिल से उतार देता हूँ,
कभी-कभी तो मैं खुद को भी मार देता हूँ।

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अपने वो नही होते, जो तस्वीर में साथ खड़े होते हैं,
अपने वो हैं जो तकलीफ में साथ खड़े होते हैं।

कर देना माफ़, अगर दुखाया हो दिल तुम्हारा,
क्या पता कफ़न में लिपटा मिले, कल ये यार तुम्हारा।

किसी की राह में नजरें बिछा कर कुछ नहीं मिलता,
सारा जहाँ बेवफा है दिल लगाकर कुछ नहीं मिलता,
कोई भी लौटकर आता नहीं आँसू बहाने से,
किसी की याद में दिल को रुलाकर कुछ नहीं मिलता।

बाज़ औकात ख़ामोशी इख्तियार नहीं मजबूरी होती है,
इंसान झूट बोलना नहीं चाहता और सच बोल नहीं सकता।

रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो,
बाकी हरेक दिल काबिल-ऐ-वफा नही होता।

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Hurt Shayari

समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे किस्से,
अगली मोहब्बत में तुम्हे फिर इनकी जरुरत पड़ेगी।

दर्द मुझे जिंदगी भर का देने तुम खुद ही आ गयी,
जो खबर होती दवा का इंतेज़ाम करके रखता।

बात ऊँची थी मगर बात जरा कम आंकी,
मेरे जज्बात की औकात जरा कम आंकी,
वो फ़रिश्ता कहकर मुझे जलील करता रहा,
मैं इंसान हूँ मेरी जात जरा कम आंकी।

अपनी नजदीकियों से दूर ना कर मुझे,
मेरे पास जीने की वजह सिर्फ तुम हो।

वो रो रो कर कहती रही मुझे नफ़रत है तुमसे,
मगर एक सवाल आज भी परेशान किये हुए है,
की अगर नफ़रत ही थी तो वो इतना रोई क्यों।

जब जब मुझे लगा की तेरे लिए ख़ास हूँ मैं,
तेरी बेरुखी ने समझा दिया की मैं झूठी आस मैं हूँ मैं।

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मोहब्बत में लाखों ज़ख्म खाए हमने,
अफ़सोस उन्हें हम पर ऐतबार नहीं,
मत पूछो क्या गुजरती है मेरे दिल पर,
जब वो कहते है हमें तुमसे प्यार नहीं।

सच कहो तो उन्हें ख्वाब लगता है,
और शिकवा करो तो उन्हें मज़ाक लगता है,
हम कितनी शिद्दत से उन्हें याद करते है,
और एक वो हैं जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है।

माना तू दिल से दूर है, प्यार में दिल थोड़ा मजबूर है,
मिला नहीं साथ उस खुदा का, इसमें उस खुदा का ही कसूर है।

एहसान किसी का वो रखते नहीं मेरा भी चुका दिया,
जितना खाया था नमक मेरा मेरे जख्मों पे लगा दिया।

सितम सह कर भी कितने ग़म छिपाये हमने,
तेरी खातिर हर दिन आँसू बहाये हमने,
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला,
तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छुपाये हमने।

वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है,
वो कोई गैर होता नहीं अपना रिश्तेदार होता है,
किसी से अपने दिल की तू कहना न भूले से,
यहाँ खत भी जरा सी देर में अखबार होता है।

क्या तुझ पता है कि कितने शिद्द्त से मैंने मोहब्बत की है,
मैंने अपनी जिंदगी की तमाम खुशियों की ठोकर मार दी है।

Best Hurt Shayari Image

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मेरी चाहत को मेरी हालत की तराजू में ना तोल,
मैंने वो ज़ख्म भी खाये जो मेरी किस्मत में नहीं थे।

मिलता तो बहुत कुछ है इस ज़िन्दगी में,
बस हम गिनती उसी की करते है, जो हासिल ना हो सका।

बहुत थक सा गया हुँ खुद को साबित करते करते,
मेरे तरीके गलत हो सकते है, मगर मेरी मोहब्बत नहीं।

दिल्लगी थी उसे हम से मोहब्बत कब थी,
महफिल-ए- गैर से उसको फुरसत कब थी,
वो कहते तो हम मोहब्बत में फ़ना हो जाते,
उसके वादों में पर वो हकीकत कहाँ थी।

वो बड़े ताज्जुब से पूछ बैठा मेरे गम की वजह,
फिर हल्का सा मुस्कराया और कहा, मोहब्बत की थी ना।

एहसान किसी का वो रखते नहीं मेरा भी चुका दिया,
जितना खाया था नमक मेरा मेरे जख्मों पे लगा दिया।

हम भी मुस्कुराते थे कभी बेपरवाह अंदाज़ से,
देखा है आज खुद को कुछ पुराणी तस्वीरों में।

आकर जरा देख तेरी खातिर हम किस तरह से जिए,
आँसू के धागे से सीते रहे हम जो जख्म तूने दिए।

तुम्हारी नाराजगी के डर से, मैं जो हर बात मान लेता था,
कभी तुमको महबूब समझकर, कभी खुद को मजबूर समझकर।

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मेरी ख़ामोशी से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता,
और शिकायत में दो लफ्ज़ कह दूँ तो वो चुभ जाते है।

किसी से जुदा होना अगर इतना आसान होता तो,
कसम से जिस्म से रूह को लेने भगवान् खुद ना आते।

चुप रह कर भी कह दिया, सब कुछ ये मेरा सलीका था,
और तुम सुनकर भी समझ, नही पाए ये उनका प्यार था।

वो पल याद है मुझे जब तेरा हाथ मेरे हाथों में था,
कोई ख्वाइश न थी बस हम साथ हो ये ख्वाब मेरे आँखे में था,
न जाने कहाँ गए वे पल बीत जब मैं तेरी और तू मेरा था।

दिए हैं ज़ख़्म तो मरहम का तकल्लुफ न करो,
कुछ तो रहने दो मेरी ज़ात पे एहसान अपना।

तुम लौट आने का तकल्लुफ मत करना,
हम एक मोहब्बत को दो बार नहीं करते।

आँसू आ जाते हैं रोने से पहले, ख्वाब टूट जाते हैं सोने से पहले,
लोग कहते हैं मोहब्बत गुनाह है, कोई रोक लेता इसे होने से पहले।

कसम खुदा की अब मैं एक आँसू न बहाऊँगा,
तू अब लाख पुकार ले मैं लौट के न आऊंगा।

कुरेद-कुरेद कर बड़े जतन से हमने रखे हैं हरे,
कौन चाहता है कि उनका दिया कोई ज़ख्म भरे।

छोड़ो ना यार क्या रखा है सुनने और सुनाने में,
असल बात यह है की किसी ने कसर नहीं छोड़ी दिल दुखाने में।

तरस गए हैं थोड़ी सी वफ़ा के लिए, किसी से प्यार न करेंगे खुदा के लिए,
जब भी लगती है इश्क की अदालत, हम ही चुने जाते हैं सजा के लिए।

शायद मैं तुम्हारे काबिल नहीं तभी तुम दूर हुए,
पर वो प्यार ही क्या जो काबिलियत के बल पर टिका हो।

न जाने वो कोन है जो बिन बुलाये आता है,
मेरे ख्याल से तेरा ख्याल ही होगा जो मुझे सताता है।

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