द्रोपदी के पांच पति का रहस्य | Interesting Facts About Draupadi

नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम महाभारत के एक रहस्य के बारे में बात करेंगे, जी हाँ दोस्तों आज महाभारत महाकाव्य में पांचाली नाम से प्रशिद्ध Draupadi के पांच पति का रहस्य के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। जिससे  आपके मन में उठ रहें सवाल कि Draupadi के पांच पति क्यों थे? और महाभारत युद्ध कराने में द्रोपती को सबसे ज्यादा श्रेय क्यों दिया जाता है। ऐसे कुछ महत्पूर्ण प्रश्नों का के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

हमारे देश में प्राचीनकाल से अभी तक बहुत ही कम सुनाने में आया है कि एक स्त्री को एक से ज्यादा पति है, हालांकि पहले राजा-महाराजा और अन्य सामर्थ व्यक्ति एक से ज्यादा स्त्री से विवाह करते थे। वैसे तो यह प्रथा अभी भी चली आ रही है, लेकिन अब इस में बहुत कमी आई हैं। क्या आप ने कभी सोचा है कि Draupadi के पांच पति क्यों थे? यदि नहीं तो हमारी इस पोस्ट द्रोपदी के पांच पति का रहस्य के बारे में शुरू से अंत तक जरुरु पढ़ें, तब आसानी से समझ  जाएंगे  की Draupati का विवाह पांडवों से क्यों हुआ था।

तो चलिए दोस्तों शुरू करते है द्रोपदी के पांच पति का रहस्य के बारे में विस्तार से जानकारी :-

Who is Draupadi in Hindi (द्रौपती कौन थी?)

महाभारत महाकाव्य में सबसे चर्चित भूमिका द्रौपती की थी, क्या आप ने कभी सोचा है की Draupati कौन थी?, द्रौपती के पिता जी का क्या नाम था? यदि आप यह सब नाहीं जानते है तो आइये जानते हैं। द्रौपती एक देव कन्या है, जो हवन कुंड से जन्म ली थी। द्रौपती के पिता द्रुपद जब द्रोणाचार्य के विनाश के उद्देश्य से पुत्र प्राप्ति के लिए हवन कर रहे थे।

तब हवन कुंड के अग्नि (Fire) से पहले बालक का आवाहन हुआ जिसका नाम धृष्टद्युम था, इसके पश्च्यात एक बालिका की उत्पति हुई जिसकी नाम कृष्णा थी। मान्यता के अनुसार द्रौपती माता काली की रूप में थी इसलिए कृष्णा नाम दिया गया था। बाद में द्रुपद के पुत्री होने के कारण द्रौपती और पांचाल की राजकुमारी होने के पांचाली तथा अन्य नाम से भी जानी जाती है।

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जिस समय अग्नि कुंड से द्रौपती की जन्म हुई, उसी समय एक आकाशवाणी हुई कि यह बालिका कुरुवंश के विनाश का कारण बनेगी। द्रौपती के पिता द्रुपद, द्रोणाचार्य समेत कुरुवंश के पुत्र के प्राप्ति के लिए महा हवन कुंड करवाया था। हवन कुंड से पुत्र और पुत्री की जन्म हुआ। जो बाद में गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु और कुरुवंश के विनास का कारण बना।

Draupati

द्रौपती के पांच पति का रहस्य

वास्तव में Draupati का विवाह अर्जुन के साथ हुआ था। जब द्रौपती के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन हुआ था। उस स्वयंवर में राजा द्रुपद के द्वारा यह शर्त रखा गया की एक यंत्र में बड़ी-सी मछली घूम रही थी। उस मछली की परछाई को एक जल पात्र में देखकर उसकी आँख में तीर भेदना था।

उस आयोजन में  जरासंध, शल्य, शिशुपाल तथा दुर्योधन, दुःशासन समेत अन्य कौरव और अन्य व्यक्ति मजूद थे। उसी आयोजन में पाण्डु के पांच पुत्र (युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव) ब्राह्माण के वेश में उपस्थित थे। जब मछली के आँख में वहां उपस्थित कोई भी व्यक्ति तीर नहीं भेद सका तब, पाण्डु पुत्र अर्जुन ने मछली के आँख तीर भेद कर द्रौपती से विवाह रचा लिया।

Note :- जिस समय Draupati की विवाह हुई थी, उस समय पांडव पुत्र युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव अपने माता कुंती के साथ अज्ञात वाश का समय व्यतीत कर रहें थे। आप सोच रहें होंगे अज्ञातवाश क्या होता है? मैं आपके जानकारी के लिए बता दूँ अज्ञात वाश के दौरान अपनी पहचान छुपा कर जीवन व्यतीत करना।

संध्या के समय जब पाण्डु पुत्र अपनी में आई तब उन्होंने अपनी माँ से कहा देखो मैं भिक्षा में क्या लाया हूँ, तब कुंती ने बिना  बोली जो लाये हो उसे सब भाई आपस में बाँट लो। उसके बाद जब कुंती पलटकर देखती हैं, वह चिंतित हो जाती हैं और कहने लगती है यह मैं क्या कह दिया। इस बात को लेकर  डांटती रहती है।

तभी भगवन कृष्ण वहां आ जाते है और बताते हैं कि कैसे द्रौपदी के लिए कुंती के मुख से ये शब्द सब कुछ पहले से ही तय है। तब भगवन कृष्ण द्रौपती को पिछले जन्म की बात याद दिलाते है। द्रौपदी ने भगवान शिव की तपस्या कर ऐसे वर की कामना की थी, जो धर्मराज की तरह न्याय प्रिय, ज्ञानी, सौंदर्य में सबसे उत्तम सर्वश्रेष्ठ गदाधारी और महान धनुर्धर हो, जो सर्वगुण संपन्न हो।

तब भगवन कृष्ण कहते है, आज के समय में कोई एक व्यक्ति सर्वगुण संपन्न नहीं है। भगवन शिव के दिए गए वचन और वरदान के कारण तुम्हें (द्रौपती) सभी पाण्डु पुत्र को अपने पति के रूप में स्वीकरना होगा। द्रौपती भगवन कृष्ण की बात मानकर सभी पाण्डु को पुत्र को अपने पति के रूप में स्वीकार कर ली।

आप में से कई लोग सोच रहें होंगे द्रौपदी के कितने पुत्र थे? पांच पतियों से द्रौपती के पांच पुत्र हुआ, जिसका नाम निम्न प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकर्मा, शतानीक, और श्रुतसेन था।

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द्रौपती की शर्त

जब द्रौपती ने पांचों पांडवों के सांझा पत्नी बनना स्वीकार किया तब उसने यह शर्त रखी कि वह अपना राज्य किसी अन्य स्त्री के साथ नहीं बांटेगी। दूसरे शब्दों में उस समय की प्रचलित परंपरा की परवाह किये बिना पांडव अपनी अन्य पत्नियों को इंद्रप्रस्थ नहीं ला सकते थे। हालाँकि अर्जुन एक पत्नी को लाने में सफल हुए। वह कृष्ण की बहन सुभद्रा थी। भगवन कृष्ण के कहने पर द्रौपती ने अर्जुन को सुभद्रा के साथ इंद्रप्रस्थ आने की इजाजत दी थी।

Conclusion

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हमने महाभारत काव्य के एक अनसुलझे रहस्य Draupadi के पांच पतियों के बारे में जाना है। उम्मीद करता हूँ की Draupati के पांच पतियों का रहस्य की जानकारी आपसभी को पसंद आई होगी। द्रौपती के पांच पतियों का रहस्य की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए इस पोड्ट को ज्यादे से ज्यादे शेयर करें, ताकि सभी लोगों को  द्रौपती के पांच पतियों का रहस्य के बारे में सही जानकारी प्राप्त हो सकें।

यदि आपको हमारी इस पोस्ट Draupadi के पांच पतियों के रहस्य की जानकारी से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव है, तो आप हमें कमेंट करके जरूर बतयाएँ। धन्यवाद्!!

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