Barish Shayari in Hindi | Rain shayari | बरसात शायरी

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Barish Shayari in Hindi

मुझे ऐसा ही जिन्दगी का हर एक पल चाहिए,
प्यार से भरी बारिश और संग तुम चाहिए।

जब भी होगी पहली बारिश, तुमको सामने पायेंगे,
वो बूंदों से भरा चेहरा तुम्हारा हम देख तो पायेंगे।

कितना कुछ धुल गया आज इस बारिश में,
हाँ तुम्हारी यादों के पन्ने भी धुल गए इस बारिश में।

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तुमको बारिश पसंद है मुझे बारिश में तुम,
तुमको हँसना पसंद है मुझे हस्ती हुए तुम,
तुमको बोलना पसंद है मुझे बोलते हुए तुम,
तुमको सब कुछ पसंद है और मुझे बस तुम।

न जाने क्यू अभी आपकी याद आ गयी, मौसम क्या बदला बरसात भी आ गयी,
मैंने छुकर देखा बूंदों को तो, हर बूंद में आपकी तस्वीर नज़र आ गयी।

तू मुझसे मेरी इश्क़ की इंतहा ना पूछ,
मेरे आंसू तुम्हें सैलाब बन कर बहा ले जायेंगे।

बारिश में हम पानी बनकर बरस जायेंगे,
पतझड़ में फूल बनके बिखर जायेंगे,
क्या हुआ जो हम आपको तंग करते हैं,
कभी आप इन लम्हों के लिए भी तरस जायेंगे।

तमाम रात नहाया था शहर बारिश से,
वो रंग उतर ही गये जो उतरने वाले थे।

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Barish Shayari

ए बादल इतना बरस की नफ़रतें धुल जायें,
इंसानियत तरस गयी है प्यार पाने के लिये।

मै आज भी अपने मुकद्दर से शर्त लगाता हूँ,
भरी बरसात में कागज की पतंग उड़ाता हूँ।

जब भी होगी पहली बारिश तुमको सामने पाएँगे,
वो बूंदों से भरा चेहरा तुम्हारा हम देख तो पाएँगे।

मौसम बरसात का आया, बहुत खुशियां साथ लाया,
मुस्कान चेहरे पर सबकी, साथ अपने बहुत सौगात लाया।

बारिश की बूंदों में झलकती है उसकी तस्वीर,
आज फिर भीग बैठे है उसे पाने की चाहत में।

मैं वो सहरा जिसे पानी की हवस ले डूबी,
तू वो बदल जो कभी टूट के बरसा ही नहीं।

मेरी महफ़िल में नज़्म की इरशाद अभी बाकी है,
कोई थोड़ा भीगा है, पूरी बरसात अभी बाकी है।

जरा ठहरो बारिश थम जाए तो फिर चले जाना,
किसी का तुझ को छू लेना मुझे अच्छा नहीं लगता।

हुस्न परी हो साथ और बे मौसम की बारिश हो जाए,
छतरी कौन खरीदेगा फिर जितनी बारिश जाए,
ऐसी प्यास की शिद्दत है की मैं ये दुआएं करता हूँ,
जितने समुन्दर हैं दुनिया में सब की बारिश हो जाए।

मौसम है बारिश का और याद तुम्हारी आती है,
बारिश के हर कतरे से आवाज तुम्हारी आती है।

कुछ इस कदर में तेरे साथ हो जाऊं,
तू हो जा बादल काले मैं बरसात हो जाऊ।

हवा संग बह चला जाएगा ये बादल भी मगर,
ये मेरे शहर आया है अब अदब से भीगना होगा।

मजबूरियाँ ओढ़ के निकलता हूँ घर से आजकल,
वरना शौक तो आज भी है बारिशो में भीगने का।

Shayari on Barish | Rain Shayari

Shayari on Barish

कितनी जल्दी यह मुलाकात गुज़र जाती है,
प्यास बुझती भी नहीं बरसात गुज़र जाती है।

इस बारिश के मौसम में अजीब सी कशिश है,
न चाहते हुए भी कोई शिद्दत से याद आता है।

अब तुझसे क्या शिकवा करूं,
लेकिन तेरी यादों की बारिश ने तबाही बहुत मचाई है।

कहीं फिसल ही न जाऊं तेरी याद में चलते-चलते,
रोक अपनी यादों को मेरे शहर में बारिश का समाँ हैं।

ये मौसम भी क्या रंग लाया है,
साथ हवा और घटाएं लाया है,
मिट्टी की खुशबू फैलाये सावन आया है,
दिल को ठंडक देने बरसात का महीना आया है।

आज की बरसात की दिल्लगी ही कुछ ऐसी है,
भीगे बिना कोई रह ना पाए थोड़ी ऐसी है,
खूबसूरती का आलम इस कद्र बढ़ गया है,
महकते मौसम का खुमार सभी पर चढ़ गया है।

बारिश में आज भीग जाने दो, बूंदों को आज बरस जाने दो,
न रोको यूँ खुद को आज, भीग जाने दो इस दिल को आज।

पहले रिमझिम थोड़ा सन्नाटा और फिर अचानक जम के बरसना,
ये तुम्हारी आदतें और जुलाई की फितरत दोनों एक जैसे है।

ये हल्की-हल्की सर्द हवाएं ये बारिश का मौसम,
मैं तुममें पूरा रहता हूं तुम मुझमें क्यों रहती हो कम।

बादलों को गुरुर था कि वो उच्चाई पे है,
जब बारिश हुई तो उसे ज़मीन की मिट्टी ही रास आयी।

आशिक तो आँखों की बात समझ लेते हैं,
सपनो में मिल जाये तो मुलाकात समझ लेते हैं,
रोता तो आसमान भी है अपने बिछड़े प्यार के लिए,
पर लोग उसे बरसात समझ लेते हैं।

बदली सावन की कोई जब भी बरसती होगी,
दिल ही दिल में वह मुझे याद तो करती होगी,
ठीक से सो न सकी होगी कभी ख्यालों से मेरे
करवटें रात भर बिस्तर पे बदलती होगी।

Romantic Barish Shayari For Girlfriend

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कभी शिद्दत की गर्मी कभी बारिश के फुहारे,
ये बादल और मोहब्बत समझ से परे है हमारे।

घटाए हैं काली आसमान में सर्द बारिश हो रही है,
रह रह कर मुस्कुरा रहा हूँ और तेरी गुजारिश हो रही है।

वो मेरे रु-बा-रु आया भी तो बरसात के मौसम में,
मेरे आँसू बह रहे थे और वो बरसात समझ बैठा।

मजबूरियाँ ओढ़ के निकलता हूँ घर से आजकल,
वरना शौक तो आज भी है बारिशो में भीगने का।

मेरे शहर का मौसम कितना खुश गंवार हो गया,
लगा जैसे आसमां को जमीन से प्यार हो गया।

रहने दो अब तुम भी मुझे पढ़ ना सकोगे,
बरसात में भीगे कागज़ की तरह भीग गया हूँ मैं।

अब भी बरसात की रातों में बदन टूटता है,
जाग उठती हैं अजब ख्वाशीषें अंगडाई की।

उसने बना कर मेरे संग रेत का महल,
ना जाने क्यूँ बारिशों को खबर कर दी।

अजब लुत्फ़ का मंज़र देखता रेहता हूँ बारिश में,
बदन जलता है और मैं भीगता रेहता हूँ बारिश में।

कहा पूरी होती है दिल की सारी हसरते की,
बारिश भी हो यार भी हो और पास भी हो।

ये इश्क़ का मौसम अजीब है जनाब,
इस बारिश में कई रिश्ते धुल जाते है,
बेगानों से करते है मोहब्बत कुछ लोग,
और अपनों के ही आंसू भूल जाते है।

हैरत से ताकता है सहरा बारिश के नज़राने को,
कितनी दूर से आई है ये रेत से हाथ मिलाने को।

दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था,
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था।

मैं तेरे जुदाई की बरसात में कब तक भीगूँ,
ऐसे मौसम में तो दीवारें भी गिर जाती हैं।

ज़रा ठहरो के बारिश है यह थम जाए तो फिर जाना,
किसी का तुझ को छु लेना मुझे अच्छ नहीं लगता।

सुना है बाजार में गिर गए हैं दाम सारे इत्र के,
बारिश की पहली बूंदों ने आज मिटटी को छुआ है।

मोहब्बत तो वो बारिश है जिसे छूने की चाहत मैं,
हथेलियां तो गीली हो जाती है पर हाथ खाली ही रह जाते है।

बारिश की बूंदों सा ये दिल गिरता बरसता है,
तुम पास होते हो मगर फिर भी तरसता रहता है।

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