Alone Shayari | Tanhai Shayari | Shayari on Loneliness

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Alone Shayari in Hindi

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया,
बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया।

तन्हाईयाँ कुछ इस तरह से डसने लगी मुझे,
मैं आज अपने पैरों की आहट से डर गया।

दोस्तो चुभते हुए ख्वाबों से कह दो अब आया न करे,
हम तन्हा तसल्ली से रहते है बेकार उलझाया न करे।

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कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी,
हजारों लोग हैं मगर कोई उस जैसा नहीं है।

Alone Shayari

साथ में जिसके एक दिन दुनिया चलता है,
वह शक्श अकसर शुरू में तन्हा चलता है।

उसे पाना उसे खोना उसी के हिज्र में रोना,
यही गर इश्क है तो हम तन्हा ही अच्छे हैं।

क्या लाजवाब था तेरा छोड़ के जाना,
भरी भरी आँखों से मुस्कुराये थे हम,
अब तो सिर्फ मैं हूँ और तेरी यादें हैं,
गुजर रहे हैं यूँ ही तन्हाई के मौसम।

हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद ना कर दे,
​तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर।

क्यों किसी को बेवजह अहंकार दिखाना है,
जिंदगी जी भर कर जियो, ऊपर अकेले जाना है।

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सहारा लेना ही पड़ता है मुझको दरिया का,
मैं एक कतरा हूँ तनहा तो बह नहीं सकता।

जिंदगी के ज़हर को यूँ हँस के पी रहे हैं,
तेरे प्यार बिना यूँ ही ज़िन्दगी जी रहे हैं,
अकेलेपन से तो अब डर नहीं लगता हमें,
तेरे जाने के बाद यूँ ही तन्हा जी रहे हैं।

तुम जब आओगे तो खोया हुआ पाओगे मुझे,
मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं,
मेरे कमरे को सजाने कि तमन्ना है तुम्हें,
मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं।

बहुत करीब से देखा है तुम्हें दूर जाते हुए,
जितना हम लोगों को खास समझते है,
उतना ही लोग हमे बकवास समझने लगते हैं।

हम अपनी हस्ती मिटाकर भी तनहा हैं,
सब कुछ लूटा कर भी तनहा हैं,
लोग डोर तक जाते हैं किसी के लिए
और हम उसके पास रहकर भी तनहा हैं।

जिंदगी के ज़हर को यूँ हँस के पी रहे हैं,
तेरे प्यार बिना यूँ ही ज़िन्दगी जी रहे हैं,
अकेलेपन से तो अब डर नहीं लगता हमें,
तेरे जाने के बाद यूँ ही तन्हा जी रहे हैं।

यूँ तो हर रंग का मौसम मुझसे वाकिफ है,
मगर रात की तन्हाई मुझे कुछ अलग ही जानती है।

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चाहते थे जिसको हम उसके दिल बदल गए,
समुंदर तो वाही था लेकिन साहिल बदल गए,
क़त्ल ऐसा हुवा हर बार किस्तों में मेरा
कभी खंजर बदल गुए तो कभी कातिल बदल गए।

Heart broken Alone Shayari In Hindi

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Heart broken Alone Shayari

मैं जो हूँ मुझे रहने दे हवा के जैसे बहने दे,
तन्हा सा मुसाफिर हूँ मुझे तन्हा ही तू रहने दे।

रोते हैं वो लोग जो मोहब्बत को दिल से निभाते हैं,
धोखा देने वाले तो दिल तोड़ कर अक्सर चैन से सो जाते हैं।

इस तरह कारवां ज़िंदगी का आसां कर दीजिए,
जो देते हैं तकलीफ़ उन्हें रिहा कर दीजिए।

दिन ब दिन बढ़ता गया यह फासला है,
फिर भी उनको पाने का हर हौसला है।

मेरे दिल के एक गड्डे कोने में, वहाँ रहती हैं तुम्हारी,
यादें देख लेना एक दिन वहाँ मैं मिट्टी भरवा दूंगा।

ना जाने क्यूँ खुद को अकेला सा पाया है,
हर एक रिश्ते में खुद को गँवाया है,
शायद कोई तो कमी है मेरे वजूद में,
तभी हर किसी ने हमें यूँ ही ठुकराया है।

यूँ दवा लेने से तेरी हिचकियाँ नहीं थमने वाली,
इलाज़ चाहिए तो मेरी मौत की दुआ किया कर।

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वो इंसान दुनिया जीतने की हिम्मत रखता है,
जो इंसान अकेले चलने की हिम्मत रखता है।

मेरा चेहरा मेरी यादें मेरी बातें रुलायेंगी,
जुदाई के दौर में गुज़री मुलाकातें रुलायेंगी,
दिनों को तो चलो बिता भी लोगे फसानों में,
जहाँ तन्हा मिलोगे तुम तुम्हें रातें रुलायेंगी।

ये भी शायद ज़िंदगी की इक अदा है दोस्तों,
जिसको कोई मिल गया वो और तन्हा हो गया।

दिन में हमें तितलियां सताती हैं,
और शम इस दिल को तन्हा कर जाती है।

मेरा और उस चाँद का मुकद्दर एक जैसा है,
वो तारों में तन्हा है और मैं हजारों में तन्हा।

रात की गहराई आँखों में उतर आई,
कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई,
ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के,
कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई।

तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे,
तुझपे गुजरे न क़यामत शब-ए-तन्हाई की।

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शहरों की भीड़ में अपना घर नहीं मिलता,
दिल तो मिलता हैं मगर मुकद्दर नहीं मिलता।

ये अकेलापन खा रहा है मुझे रोज दीमक की तरह,
जैसे कोई तेल जल रहा हो दिए में दीपक की तरह

जगमगाते शहर की रानाइयों में क्या न था,
ढूँढ़ने निकला था जिसको बस वही चेहरा न था,
हम वही, तुम भी वही, मौसम वही, मंज़र वही,
फ़ासले बढ़ जायेंगे इतने मैंने कभी सोचा न था।

एक पल का एहसास बनकर आते हो तुम,
दूसरे ही पल खुवाब बनकर उड़ जाते हो तुम,
जानते हो की लगता है डर तन्हाइयों से,
फिर भी बार बार तनहा छोड़ जाते हो तुम।

तेरे दिल के करीब आना चाहती हूँ मैं,
तुझको नहीं और अब खोना चाहती हूँ मैं,
अकेले इस तनहाई का दर्द बर्दाश्त नहीं होता,
तू एक बार आजा तुझसे लिपट कर रोना चाहती हूँ मैं।

मुझे ज़रा गौर से देखोगे तो ये ज़रूर जान जाओगे,
के तुम्हारे बिन हर लम्हा हमारी जान ले लेता है।

ज़ख्म पुराने हुए कोई तो नया ज़ख्म दे जाओ ,
चलो आओ फिर से फिर से वही इश्क़ ले आओ।

लाख मे खाना खरबोंकि तरह रहता हूँ,
पर किसी आँखमे ख्वाबोंकि तरह रहता हूँ।

बहुत ज्यादा जुल्म करती हैं तुम्हारी यादे,
सो जाऊ तो जगा देती हैं, उठ जाऊ तो रुला देती हैं।

ज़िंदगी अपनी तेरे इंतज़ार में गुज़ारता हैं कोई,
शबाना रोज़ अपनी चाहत को मारता हैं कोई।

तन्हाईयाँ कुछ इस तरह से डसने लगी मुझे,
मैं आज अपने पैरों की आहट से डर गया।

हम तो जल गए यारों की मोहब्बत में मूम की तरह,
अगर फिर भी कोई हमें बेवफा कहे तो उसकी वफ़ा को सलाम अपना।

कभी इसका दिल रखा कभी उसका दिल रखा,
इसी कशमकश में भूल गए कि किसका दिल रखा।

कितना अजीब हाल है दिल तकलीफ में है,
और तकलीफ देने वाला आज भी दिल में है।

जब महफ़िल में भी तन्हाई पास हो,
रोशनी में भी अँधेरे का एहसास हो,
तब किसी खास की याद में मुस्कुरा दो,
शायद वो भी आपके इंतजार में उदास हो।

हमारी कलम से निकले,लफ्ज खुश नसीब बहुत हैं,
पहुँच जाते हैं उसके दिल में,जहां हम न पहुंच सके।

मेरी लिखी किताब मेरे हाथो में देकर कहने लगे,
इसे पढा करो मोहब्बत करना सिख जाओगे।

यूँ भी हुआ रात को जब सब सो गए,
तन्हाई और मैं तेरी बातों में खो गए।

हम तो बिछड़े थे तुम्हें अपनी याद दिलाने के लिए,
मगर तुम ने तो हमारे बिन जीना ही सीख लिए।

मंजिल की तलाश में किस्मत से लड़ना पड़ता है,
सफलता की राह में अक्सर अकेला चलना पड़ता है।

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की,
तुम क्या समझो तुम क्या जानो मेरी बात तन्हाई की।

जब महफ़िल में भी तन्हाई पास हो,
रोशनी में भी अँधेरे का एहसास हो,
तब किसी खास की याद में मुस्कुरा दो,
शायद वो भी आपके इंतजार में उदास हो।

जगमगाते शहर की रानाइयों में क्या न था,
ढूँढ़ने निकला था जिसको बस वही चेहरा न था,
हम वही, तुम भी वही, मौसम वही, मंज़र वही,
फ़ासले बढ़ जायेंगे इतने मैंने कभी सोचा न था।

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